प्रेरक विचार




ख़ुद को पहचानो और सबसे ज़्यादा भरोसा ख़ुद पर करो..


               आप कभी पहाड़ पर गए होंगे और वहां पर अपनी गूंज भी सुनी होगी जो बार बार गूंजती रहती हैं। उससे क्या सीख मिलती है कभी सोचा है। अगर आप ऐसा करते भी हो तो बस बाद में भूलते भी होंगे कि चल यार जाने दो कौन सोचेगा करेगा इतना। उसका मतलब होता है आप जो भी हो बस गूंजते रहो अपने लक्ष्य के पागलपन में आवाज़ एक बार दस लोगों तक पहुंच सकती है सौ या हज़ार लोगों तक नहीं पहुंच सकती। यादी आप उस आवाज़ को पूरे तन मन से इस दुनियां तक पहुंचाना चाहते हो तो उसे बार बार गूंजना ही होगा। तब कहीं जाकर वो पहाड़ियों जैसा महसूस कर सकते हो। उस आवाज़ में ना एक सरलता और निर्भय रहता हैं बस उसे अच्छे से सुनकर पहचानना है आपको और सच में ख़ुद को पहचानो और ज़िंदगी में आगे बढ़ो।

  

             मैंने कभी ऐसा नहीं देखा है कि मछली ज़मीन पर खेल रही है और आकाश में हिरन उड़ रहा है। ऐसा हो भी नहीं सकता क्योंकि हर एक जानवर अपने अपने अलग अलग तरीकों के कला के लिए समर्थ है। और वो वहीं करता है जो वो ख़ुद समझे पहचाने तो हम तो इंसान है हम क्यों नहीं कर सकते हैं। अपने आप को एक सरल सीधी ज़िंदगी की रेशों से बाहर निकालो और कहीं सारे सवाल करों जो तुम्हारे खोज की सम्बंधित हो। अपने चींटी को देखा होगा जो पूरे शिस्त में रहती है क्योंकी वो जानती है की उसका ख़ुद का सही तरीके में रहना भी एक सफ़लता का मार्ग हो सकता है।


            आप जो करना चाहते हैं को करो ताकी आपको ख़ुशी भी मिले और वो काम पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करने की इच्छा ही प्राप्त हो जाए। ये मत सोचना की मै इससे अमीर बनुंगा, सब चीजें ख़रीद लूंगा और अच्छी खासी ज़िंदगी गुजारूंगा इसमें आती है आपकी वासना। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मन में कोई भी वासना नहीं होनी चाहिए।कौन क्या बोलता है आपके बारे में मत सोचो आज जो लोग आपको हस रहें है कल वहीं लोक आपके नाम पर गर्व करेंगे।कोई भी चीज़ खोजने से पहले ख़ुद को खोज लो ताकी दुनियां आपके लिए तरसे।


               हाती ताकदवार होता है पर चपलता नहीं है।हिरन में चपलता है पर ताकदवार नहीं है। कभी कभी हम कछुवा को भी देखते है वो तो ख़ुद का रक्षण ख़ुद ही करता है।दुनियां में हर एक चीज़ अपने आप के लिए प्रभावित है।कोई भी कमी किसी में भी नहीं हैं। हर एक इंसान पशू जानवर अपने अपने अंदाज पर सही है। हर एक में अलग अलग खूबी है कोई भी ऐसा नहीं जो सर्व गुण के काबिल हो।एक बार ग़ौर से देखना कौआ इतना काला है सब गुस्सा करते है कहीं लोग तो उसे देखना अशुभ मानते लेकीन क्या कौआ अपनी जिंदगी जीना छोड़ता है? नहीं ना... वो अपने अंदाज में ही ज़िंदगी जीता है उड़ता है खाता है, अपने है आवाज़ में बोलता है क्योंकी उसे पता होगा हसने वाले क्या करेंगे उसे ख़ुद अपना मालिक बनकर रहना है तो कहीं दूसरे चीजों के बारे में इतना क्यों सोचे।

                   

          याद रखना जंगल में कहीं सारी ऐसी चीजें है जिससे बहुत कुछ अच्छा सीखने को मिलता है। ये ही सोचलो कोयल की कितनी मिठास आवाज़ होती है। लेकिन वो गाती है तो घमंड होता हैं। उतनी ख़ुशी नहीं मिलती जब कोई छोटी सी चिड़िया चिल्लाने लगें तो कितना अच्छा लगता है। क्योंकी वो आवाज़ की मिठास दिलसे आती है। इसलिए बोलता है पहले ख़ुद को पहचानो। और पूरे नित्य और सातत्य के साथ आगे चलो। ज़िंदगी में कहीं सारी चुनौतियां आयेगीं हर वक्त खड़ी रहेंगी ताकी आप कितने सक्षम हो ये देखने आप जहा रहते हो वहां कितने लोग होंगे जो आपको कम समझे।क्या करना है पहले आप सोचो। और सबसे ज्यादा भरोसा ख़ुद पर रखना ये एक मात्र चीज़ है जो दुनिया में कोई न छीन सकता है, ना तोड़ सकता है ना मिटा सकता है। बस सबसे पहले आपको खोजना होगा क्या करना है और मुसीबतें आ भी जाए तो जड़ के कैसे सामना करे पूरे भरोसे से देख लेना एक दिन मंजिल आपकी जरूर आपके पास होंगी।

 

      लेखन : ओमकार जगदेव वाडकर

                संगमेश्वर रत्नागिरी

             

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