प्रेरक विचार
★ ख़ुद को पहचानो और सबसे ज़्यादा भरोसा ख़ुद पर करो.. आप कभी पहाड़ पर गए होंगे और वहां पर अपनी गूंज भी सुनी होगी जो बार बार गूंजती रहती हैं। उससे क्या सीख मिलती है कभी सोचा है। अगर आप ऐसा करते भी हो तो बस बाद में भूलते भी होंगे कि चल यार जाने दो कौन सोचेगा करेगा इतना। उसका मतलब होता है आप जो भी हो बस गूंजते रहो अपने लक्ष्य के पागलपन में आवाज़ एक बार दस लोगों तक पहुंच सकती है सौ या हज़ार लोगों तक नहीं पहुंच सकती। यादी आप उस आवाज़ को पूरे तन मन से इस दुनियां तक पहुंचाना चाहते हो तो उसे बार बार गूंजना ही होगा। तब कहीं जाकर वो पहाड़ियों जैसा महसूस कर सकते हो। उस आवाज़ में ना एक सरलता और निर्भय रहता हैं बस उसे अच्छे से सुनकर पहचानना है आपको और सच में ख़ुद को पहचानो और ज़िंदगी में आगे बढ़ो। मैंने कभी ऐसा नहीं देखा है कि मछली ज़मीन पर खेल रही है और आकाश में हिरन उड़ रहा है। ऐसा हो भी नहीं सकता क्योंकि हर एक जानवर अपने अपने अलग अलग तरीकों के कला के लिए समर्थ है। और वो वहीं करता है...